9 सरकारी बैंकों के विलय की खबर फर्जी, PIB ने किया वायरल Gazette का Fact Check
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर सरकारी बैंकों के बड़े विलय को लेकर वायरल हो रहा एक कथित Gazette Notification फर्जी निकला है। पत्र सूचना ब्यूरो (PIB) Fact Check ने स्पष्ट किया है कि वित्त मंत्रालय के नाम से प्रसारित यह दस्तावेज आधिकारिक नहीं है और इसे मंत्रालय की ओर से जारी नहीं किया गया है।
दरअसल, सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें दावा किया गया कि केंद्र सरकार ने नौ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के विलय की योजना को अधिसूचित कर दिया है। कथित दस्तावेज में नौ बैंकों को तीन बड़े बैंकिंग समूहों में शामिल करने का दावा किया गया था।
वायरल दस्तावेज के मुताबिक Indian Bank, Bank of Maharashtra और Central Bank of India को State Bank of India में मिलाने का दावा किया गया। इसी तरह Union Bank of India, Bank of India और Punjab & Sind Bank को Punjab National Bank में तथा Canara Bank, Indian Overseas Bank और UCO Bank को Bank of Baroda में मिलाने की बात कही गई थी।
दस्तावेज को देखने पर वह सरकारी Gazette जैसा दिखाई देता है और उसमें मंत्रालय, अधिसूचना संख्या तथा तारीख जैसी जानकारियां भी दी गई थीं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर इसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी। लेकिन PIB Fact Check ने 16 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह दस्तावेज फर्जी है और वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नहीं किया गया है।
PIB Fact Check ने लोगों से अपील की है कि सरकार से जुड़ी किसी भी महत्वपूर्ण सूचना को सोशल मीडिया पोस्ट, वायरल तस्वीर या अनजान PDF के आधार पर सही न मानें। ऐसी खबरों की पुष्टि संबंधित मंत्रालय, RBI अथवा अन्य आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से करनी चाहिए।
गौरतलब है कि भारत में पहले भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का बड़े स्तर पर विलय हो चुका है। इसी वजह से बैंक मर्जर से जुड़ी फर्जी सूचनाएं आसानी से लोगों का ध्यान खींचती हैं। वर्ष 2019 में सरकार ने 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को चार बैंकों में मिलाने की घोषणा की थी, जिसका प्रभाव 1 अप्रैल 2020 से हुआ था।
नौ सरकारी बैंकों के SBI, PNB और Bank of Baroda में विलय की वायरल Gazette अधिसूचना फर्जी है। फिलहाल इस दस्तावेज के आधार पर किसी बैंक के विलय या ग्राहकों के बैंक खातों में बदलाव की बात सही नहीं मानी जानी चाहिए।