PVR INOX का बड़ा फैसला: खत्म होगी VPF, छोटे फिल्म निर्माताओं को राहत; जानें नई फीस व्यवस्था

First Lead Desk

PVR INOX का बड़ा फैसला! फिल्मों पर नहीं लगेगी VPF, छोटे निर्माताओं को मिलेगी बड़ी राहत

मल्टीप्लेक्स चेन ने CCI के सामने रखा प्रस्ताव, लेकिन VPF खत्म होने के बाद भी लगेगा Exhibition Service Charge

नई दिल्ली: छोटे और मझोले बजट की फिल्मों का निर्माण करने वाले इंडिपेंडेंट फिल्म प्रोड्यूसर्स के लिए बड़ी खबर है। देश की प्रमुख मल्टीप्लेक्स चेन PVR INOX ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के सामने फिल्मों से ली जाने वाली Virtual Print Fee (VPF) को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि, पहली नजर में यह फैसला फिल्म निर्माताओं के लिए बड़ी राहत जैसा दिखता है, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था को समझना जरूरी है। VPF खत्म होने के बावजूद PVR INOX फिल्मों के प्रदर्शन से जुड़ी लागत के लिए नई शुल्क व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दे रहा है।

आखिर क्या होती है VPF?

करीब दो दशक पहले तक फिल्मों के प्रिंट तैयार कर उन्हें अलग-अलग शहरों के सिनेमाघरों तक भेजा जाता था। इसके लिए प्रिंट तैयार करने, परिवहन और रखरखाव पर काफी खर्च होता था।

इसके बाद सिनेमा में डिजिटल तकनीक का दौर आया। फिल्मों को डिजिटल फॉर्मेट में सिनेमाघरों तक पहुंचाया जाने लगा। इसके लिए सिनेमाघरों में डिजिटल प्रोजेक्टर और अन्य तकनीकी सुविधाएं स्थापित की गईं।

इसी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में किए गए निवेश की लागत की भरपाई के लिए Virtual Print Fee यानी VPF की व्यवस्था शुरू हुई। भारत में यह व्यवस्था करीब 2007 के आसपास शुरू हुई थी।

डिजिटल सिनेमा आने के बाद भी जारी रही VPF

फिल्म निर्माताओं का तर्क रहा है कि VPF मूल रूप से डिजिटल सिनेमा की ओर संक्रमण के दौरान लिया जाने वाला शुल्क था। जब देश के अधिकांश सिनेमाघरों का डिजिटलीकरण पूरा हो गया तो इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए था।

बताया जाता है कि भारत में सिनेमाघरों का डिजिटलीकरण 2014 तक काफी हद तक पूरा हो चुका था, जबकि हॉलीवुड स्टूडियो के साथ VPF व्यवस्था करीब 2018 के आसपास खत्म हो गई। इसके बावजूद भारतीय निर्माताओं से VPF वसूली जारी रही।

यही वजह रही कि फिल्म निर्माताओं ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू किए।

छोटे बजट की फिल्मों पर ज्यादा असर

VPF का सबसे ज्यादा असर छोटे और मझोले बजट की फिल्मों पर पड़ता है। किसी एक स्क्रीन पर शुल्क बहुत बड़ा दिखाई नहीं देता, लेकिन जब फिल्म को सैकड़ों स्क्रीन पर रिलीज किया जाता है तो कुल लागत काफी बढ़ जाती है।

फिल्म निर्माताओं के संगठन ने CCI के सामने यह भी शिकायत की कि VPF की व्यवस्था में बड़े और छोटे निर्माताओं के साथ अलग-अलग व्यवहार की संभावना है। इससे छोटे निर्माताओं के लिए अपनी फिल्मों को बड़े स्तर पर रिलीज करना मुश्किल हो सकता है।

CCI ने माना था प्रथम दृष्टया जांच का मामला

इस मामले में 30 सितंबर 2025 के आदेश में CCI ने कहा था कि PVR INOX के खिलाफ प्रथम दृष्टया जांच का मामला बनता है।

आयोग के सामने यह भी सवाल था कि क्या VPF की मौजूदा व्यवस्था छोटे निर्माताओं के लिए सिनेमाघरों तक पहुंच बनाने में बाधा पैदा कर रही है और क्या डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत पूरी हो जाने के बाद भी यह शुल्क वसूलना उचित है।

PVR INOX ने रखा नया प्रस्ताव

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय PVR INOX ने CCI के सामने Commitment के जरिए विवाद खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।

प्रस्ताव स्वीकार होने पर PVR INOX फिल्मों से VPF लेना बंद कर देगा। इसके अलावा फिल्मों की रिलीज के लिए पहले से लिया जाने वाला किसी भी तरह का अग्रिम भुगतान भी बंद करने का प्रस्ताव है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फिल्म दिखाने की लागत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

VPF की जगह लगेगा Exhibition Service Charge

प्रस्ताव के मुताबिक VPF खत्म होने के बाद Exhibition Service Charge की व्यवस्था लागू की जा सकती है।

  • सामान्य स्क्रीन पर 450 रुपये प्रति शो
  • प्रीमियम स्क्रीन पर 600 रुपये प्रति शो
  • एक स्क्रीन पर फिल्म के 60 शो पूरे होने के बाद शुल्क घटकर क्रमशः 250 रुपये और 350 रुपये प्रति शो हो जाएगा।

खास बात यह है कि निर्माता को यह शुल्क फिल्म रिलीज से पहले नहीं देना होगा। प्रस्ताव के मुताबिक यह रकम हर सप्ताह होने वाली बॉक्स ऑफिस कमाई में निर्माता या वितरक के हिस्से से काटी जाएगी।

राजस्व हिस्सेदारी का भी विकल्प

निर्माता या वितरक निश्चित शुल्क के बजाय राजस्व हिस्सेदारी वाला मॉडल भी चुन सकता है।

PVR INOX के प्रस्ताव के अनुसार इस व्यवस्था में निर्माता या वितरक के मौजूदा बॉक्स ऑफिस हिस्से में अधिकतम 7.5 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी फिल्म में निर्माता या वितरक का हिस्सा 50 प्रतिशत है, तो 7.5 प्रतिशत की कमी के बाद यह हिस्सा 42.5 प्रतिशत रह सकता है।

1 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई आपत्तियां

CCI ने PVR INOX के प्रस्ताव को सार्वजनिक करते हुए फिल्म उद्योग और आम लोगों से टिप्पणियां, आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इसके लिए 1 अक्टूबर 2026 अंतिम तारीख तय की गई है।

अब देखना होगा कि CCI इस प्रस्ताव को किस रूप में मंजूरी देता है और इसका वास्तविक असर छोटे तथा मझोले बजट की फिल्मों की रिलीज लागत पर कितना पड़ता है।

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