रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान, भारत पर भी पड़ सकता है असर
नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले रूस प्रतिबंध संबंधी नए विधेयक में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। इस सूची में भारत का नाम भी सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बिल आगे बढ़ चुका है और अब इसकी अंतिम वोटिंग पर नजर है।
क्या है ट्रंप का नया बिल?
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित कानून के तहत रूस से महत्वपूर्ण मात्रा में तेल या गैस खरीदने वाले देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को मिल सकता है। भारत और चीन रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए इस प्रावधान का असर दोनों देशों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए हुए प्रक्रियात्मक मतदान में यह प्रस्ताव 214-211 के अंतर से आगे बढ़ा। हालांकि, अंतिम रूप से कानून बनने से पहले आगे की संसदीय प्रक्रिया और मतदान बाकी है।
भारत के लिए क्यों अहम है मामला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में रूस से आने वाले तेल पर किसी तरह का अतिरिक्त व्यापारिक दबाव पड़ने पर भारतीय रिफाइनरों की लागत, आयात व्यवस्था और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ सकता है।
हालिया आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में भारत का कच्चे तेल का आयात सालाना आधार पर 25.8 प्रतिशत बढ़कर 16.69 अरब डॉलर पहुंच गया। इसी दौरान भारत के क्रूड बास्केट की कीमत करीब 90.19 डॉलर प्रति बैरल रही।
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल तुरंत महंगा हो जाएगा?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। अमेरिकी बिल के पारित होने, उसके अंतिम प्रावधानों, भारत पर उसके वास्तविक लागू होने और भारतीय तेल कंपनियों की प्रतिक्रिया के बाद ही इसके संभावित आर्थिक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
हालांकि, यदि रूसी तेल की खरीद पर अतिरिक्त लागत या व्यापारिक बाधा आती है, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे आयात लागत बढ़ने की स्थिति में घरेलू ईंधन कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।
पहले से महंगे कच्चे तेल के बीच नई चुनौती
भारत पहले ही वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति संबंधी दबाव का सामना कर रहा है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। Reuters के अनुसार, अगस्त में भारत का क्रूड आयात बिल भी बढ़ा था।
ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंध संबंधी विधेयक की आगे की स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अंतिम वोटिंग और उसके बाद की विधायी प्रक्रिया पर है।