अंग्रेजों के जमाने से जारी है परंपरा, इस थाने में वर्दी उतारकर यजमान बनते हैं पुलिसकर्मी

First Lead Desk

बिहार का अनोखा थाना! सावन पूर्णिमा पर खाकी छोड़ पीली धोती पहनते हैं थानेदार, 160 साल पुरानी परंपरा

गोपालगंज (बिहार): बिहार के गोपालगंज जिले का कुचायकोट थाना सोशल मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में कौतूहल का विषय बना हुआ है। रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर जहां देश भर के थानों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहती है, वहीं इस थाने का नजारा किसी पावन मंदिर जैसा तब्दील हो जाता है। यहां तैनात थानेदार (SHO) और अन्य पुलिसकर्मी खाकी वर्दी और लाठी छोड़कर पीली धोती धारण करते हैं और हाथ में पूजा की थाली थामे नजर आते हैं।

अंग्रेजों के जमाने से जारी है परंपरा

यह कोई आधुनिक बदलाव नहीं, बल्कि पिछले 160 से अधिक वर्षों से चली आ रही एक ऐतिहासिक परंपरा है। स्थानीय दावों के अनुसार, कुचायकोट थाना परिसर में एक प्राचीन सती माता मंदिर स्थापित है। अंग्रेजों के शासनकाल से ही इस मंदिर में सावन पूर्णिमा के दिन विशेष वार्षिक पूजा का आयोजन किया जाता रहा है।

थानेदार बनते हैं मुख्य यजमान

इस विशेष दिन पर कानून व्यवस्था संभालने वाले जांबाज अफसर पूरी तरह धार्मिक अनुष्ठान के रंग में रंगे नजर आते हैं।
  • मुख्य यजमान: कुचायकोट थाने के वर्तमान थानेदार (SHO) स्वयं मुख्य यजमान की भूमिका निभाते हैं।
  • पहनावा: परंपरा के अनुसार, यजमान बने थानेदार और पूजा में शामिल अन्य पुलिसकर्मी खाकी की जगह पीली धोती और कुर्ता पहनते हैं।
  • जन-भागीदारी: इस पावन अनुष्ठान में केवल पुलिस महकमा ही नहीं, बल्कि स्थानीय जनता और पुलिसकर्मी मिलकर माता सती की आराधना करते हैं।

पूजा के बाद भव्य भंडारा

सावन पूर्णिमा के दिन सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। पूरा थाना परिसर अगरबत्ती और कपूर की खुशबू से सराबोर रहता है। माता सती की महाआरती के बाद स्थानीय लोगों और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के लिए भव्य भंडारे और प्रसाद का वितरण किया जाता है। दशकों से जो भी अधिकारी इस थाने में पदस्थापित होता है, वह इस अनूठी परंपरा का निर्वहन पूरी श्रद्धा के साथ करता है।
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