मोतिहारी में शोक की लहर: प्रख्यात महिला चिकित्सक डॉ. फुल कुमारी सिंह का निधन, चिकित्सा जगत स्तब्ध

First Lead Desk
मोतिहारी, पूर्वी चंपारण: पूर्वी चंपारण जिले की जानी-मानी, सुप्रसिद्ध और अत्यंत सम्मानित महिला चिकित्सक डॉ. फुल कुमारी सिंह का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर जैसे ही शहर और जिले के कोने-कोने में फैली, पूरे क्षेत्र के चिकित्सा जगत, सामाजिक संगठनों और स्थानीय आम नागरिकों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई। डॉ. फुल कुमारी सिंह केवल एक चिकित्सक नहीं थीं, बल्कि वे मोतिहारी और आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, महिला सशक्तीकरण और निस्वार्थ समाज सेवा की एक मजबूत स्तंभ थीं। उनका जाना पूरे चंपारण के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है।

एक समर्पित जीवन और अविस्मरणीय चिकित्सीय सफर

डॉ. फुल कुमारी सिंह ने अपना पूरा जीवन समाज के स्वास्थ्य और विशेषकर महिलाओं व बच्चों के इलाज के लिए समर्पित कर दिया था। उस दौर में जब चंपारण और बिहार के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी थी और महिला चिकित्सकों की संख्या न के बराबर थी, तब उन्होंने मोतिहारी को अपनी कर्मभूमि बनाया।
  • अनुभव और विशेषज्ञता: वे अपने लंबे चिकित्सीय अनुभव और सटीक निदान के लिए दूर-दूर तक जानी जाती थीं। जटिल से जटिल मामलों को भी वे बेहद सूझबूझ और धैर्य के साथ संभालती थीं।
  • मरीजों से आत्मीय रिश्ता: उनके इलाज की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे मरीजों को केवल दवा नहीं देती थीं, बल्कि अपने ममतामयी और सकारात्मक व्यवहार से उनका आधा दर्द वैसे ही दूर कर देती थीं।
  • गरीबों की मसीहा: आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवेश से आने वाले मरीजों के लिए उनके क्लिनिक के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। कई बार उन्होंने बिना किसी फीस के जरूरतमंदों का इलाज किया और उन्हें मुफ्त दवाइयां भी उपलब्ध कराईं।

बदलती पारिवारिक संरचना और सामाजिक ताने-बाने पर प्रभाव

डॉ. फुल कुमारी सिंह जैसी शख्सियतें समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखने का काम करती थीं। आज के दौर में जहां रिश्ते टूट रहे हैं और पारिवारिक संरचनाएं तेजी से बिखर रही हैं, वे अपने मरीजों और समाज के लिए एक अभिभावक की भूमिका निभाती थीं।
  • कौंसिलर की भूमिका: एक चिकित्सक होने के साथ-साथ वे अक्सर उन परिवारों और दंपतियों को भी समझाती थीं, जो पारिवारिक तनाव या आपसी मतभेदों से गुजर रहे होते थे।
  • पारिवारिक मूल्यों की सीख: उनका मानना था कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण तभी संभव है जब परिवार की संरचना मजबूत हो और आपसी रिश्तों में सम्मान व विश्वास बना रहे। उनका जीवन बदलते समय में भी पुराने और मजबूत सामाजिक मूल्यों को जीवित रखने का बेहतरीन उदाहरण था।

चिकित्सा जगत और समाज में शोक की लहर

उनके निधन का समाचार मिलते ही मोतिहारी के विभिन्न अस्पतालों, निजी क्लीनिकों और सामाजिक मंचों पर शोक सभाओं का दौर शुरू हो गया है। चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्होंने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा दी थी।
  1. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की ओर से शोक: आईएमए के स्थानीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ डॉक्टरों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। डॉक्टरों का कहना है कि डॉ. फुल कुमारी सिंह हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थीं।
  2. सामाजिक संगठनों ने दी श्रद्धांजलि: विभिन्न रोटरी क्लब, लायंस क्लब और महिला विकास मंचों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि चंपारण ने आज अपनी एक सच्ची हितैषी को खो दिया है।
  3. जनप्रतिनिधियों ने जताया दुख: स्थानीय विधायकों, सांसदों और अन्य राजनेताओं ने शोक संदेश जारी कर कहा है कि डॉ. सिंह का जाना जिले के लिए एक ऐसी अपूर्णीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले लंबे समय तक संभव नहीं है।

अंतिम विदाई की तैयारी

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. फुल कुमारी सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके निवास स्थान पर रखा जाएगा, जहां शहर के गणमान्य लोग, उनके पुराने मरीज और शुभचिंतक उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी विस्तृत जानकारी और समय सारणी जल्द ही परिजनों द्वारा आधिकारिक तौर पर साझा की जाएगी, ताकि लोग उनके अंतिम सफर में शामिल हो सकें।

एक अपूर्णीय क्षति और पीछे छूटी विरासत

डॉ. फुल कुमारी सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए सेवा कार्य, हजारों परिवारों को दी गई नई जिंदगी और चंपारण के स्वास्थ्य क्षेत्र में उनका अमूल्य योगदान हमेशा जीवित रहेगा। वे अपने पीछे सेवा, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा की एक ऐसी समृद्ध विरासत छोड़ गई हैं, जो आने वाली पीढ़ी के डॉक्टरों और समाजसेवियों को हमेशा रास्ता दिखाती रहेगी।
न्यूज पेट्रेल (News Petrel) परिवार इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। ॐ शांति!
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