बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खेत बचाओ अभियान में मृदा संरक्षण, जल प्रबंधन और टिकाऊ खेती पर जोर दिया। बिहार में 7,275 किसान चौपालों से 6,19,436 किसान जागरूक हुए।
पटना: बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ‘खेत बचाओ अभियान’ को लेकर आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेते हुए मृदा संरक्षण, जल प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेतों का संरक्षण, किसानों की समृद्धि और टिकाऊ कृषि बिहार सरकार की प्राथमिकता है।
कृषि भवन, पटना स्थित अपने कार्यालय कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए श्री सिन्हा ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी, संरक्षित जल और जागरूक किसान ही समृद्ध कृषि एवं आत्मनिर्भर बिहार की मजबूत नींव हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। इसमें विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप खेत बचाओ अभियान को बढ़ावा
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की समृद्धि के विजन के अनुरूप बिहार सरकार ‘खेत बचाओ अभियान’ को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करके कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
7,275 किसान चौपालों के जरिए 6.19 लाख से अधिक किसानों को किया गया जागरूक
कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के मार्गदर्शन में बिहार में विगत 1 जून से 30 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान’ संचालित किया गया था। इस दौरान राज्यभर में 7,275 किसान चौपालों का आयोजन कर 6,19,436 किसानों को जागरूक किया गया।
उन्होंने कहा कि किसान चौपालों के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। यह पहल टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण रही है।
26 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलेगा प्रस्तावित अभियान
विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि आगामी 26 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रस्तावित ‘खेत बचाओ अभियान’ को बिहार में व्यापक जनभागीदारी के साथ संचालित करने की योजना है।
इस अभियान के तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संरक्षण और पोषक तत्वों के सतत प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाएगा। किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय कर्मियों के बीच समन्वय मजबूत कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा।
मिट्टी और जल संरक्षण के लिए इन उपायों पर जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण उपायों को अपनाना आवश्यक है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।
- खेतों में मिट्टी की नमी बनाए रखना।
- संतुलित उर्वरक एवं पोषक तत्वों का उपयोग करना।
- फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना।
- फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करना।
- दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देना।
- प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना।
उन्होंने कहा कि इन उपायों से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने और कृषि उत्पादन की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका
कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों और विभागीय कृषि प्रसार तंत्र के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है, जिनसे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, जल संसाधनों और पर्यावरण का भी संरक्षण हो सके।
‘खेत सुरक्षित, समृद्ध किसान, खुशहाल बिहार’
श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि खेती केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और जीवन का आधार है। खेत सुरक्षित रहेंगे, मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और जल संसाधनों का संरक्षण होगा, तभी कृषि का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बनेगा।
उन्होंने कहा, “प्रकृति ही शक्ति है और प्रकृति के प्रति हमारी भक्ति एवं श्रद्धा आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। इसी संकल्प के साथ हम शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर इस अभियान का शुभारंभ कर रहे हैं।”
कृषि मंत्री ने विश्वास जताया कि किसानों की सक्रिय भागीदारी, वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से बिहार में टिकाऊ कृषि को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि खेतों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।