लखनऊ: उत्तर प्रदेश की तहसीलों में आम जनता को चक्कर कटवाने वाले और फाइलों को दबाकर बैठने वाले अफसरों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा चाबुक चला है. दाखिल खारिज (Mutation), वरासत और पैमाइश (Measurement) जैसे जमीन-जायदाद से जुड़े राजस्व मामलों के निपटारे में लापरवाही और लेटलतीफी बरतने के आरोप में 10 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निलंबित कर दिया गया है. सरकार की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब 7 उपजिलाधिकारी (SDM) भी मुख्यमंत्री के सीधे रडार पर आ चुके हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय के कड़े रुख के बाद पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
डेटा मैपिंग से पकड़ी गई लापरवाही, मांगे गए स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के निर्देश पर राजस्व परिषद ने आरसीसीएमएस (राजस्व कोर्ट कंप्यूटर Management सिस्टम) के आंकड़ों की गहन समीक्षा की. इस डिजिटल डेटा स्क्रूटनी में कई अफसरों का प्रदर्शन बेहद खराब और असंतोषजनक पाया गया.
- एसडीएम पर शिकंजा: चिन्हित किए गए 7 खराब प्रदर्शन करने वाले एसडीएम में लखनऊ की सरोजनीनगर और सदर तहसील के उपजिलाधिकारी (SDM) भी शामिल हैं.
- जवाब न मिलने पर गाज: इन सभी 7 अधिकारियों को नोटिस भेजकर तुरंत स्पष्टीकरण (Explanation) मांगा गया है. शासन स्तर से स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो इनके खिलाफ भी कड़ी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
13 अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के तहत बीते एक हफ्ते के भीतर केवल निलंबन ही नहीं हुआ है, बल्कि 13 अन्य तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया गया है. लापरवाही के मामलों की तहसीलवार और अधिकारीवार लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है.
“जनता की परेशानी बर्दाश्त नहीं” – सीएम योगी का सख्त संदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों और आम नागरिकों के जमीन से जुड़े मामलों को बेवजह लटकाना अब भारी पड़ेगा. राजस्व वादों का समय सीमा के भीतर निस्तारण न होना सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनता है.
राजस्व परिषद की कमिश्नर एवं सचिव कंचन वर्मा के मुताबिक, बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद जिन अफसरों ने मुकदमों के निस्तारण में ढिलाई बरती, उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत यह एक्शन लिया गया है.