नेपाल में ग्लेशियर झील फटने से भीषण तबाही: बिहार में हाई अलर्ट, कुछ ही घंटों में रौद्र रूप दिखा सकती है गंडक नदी
पटना/मुजफ्फरपुर: तिब्बत और नेपाल के सीमावर्ती उच्च पहाड़ी क्षेत्र में एक संदिग्ध ग्लेशियर झील के फटने (Glacial Lake Outburst) के कारण अचानक भीषण जलप्रलय आ गया है। नेपाल के रसुवा (Rasuwa) जिले में भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आए इस प्रचंड सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। इस जल प्रलय का सीधा असर अब उत्तर बिहार की नदियों पर पड़ने की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते बिहार के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
गंडक और बूढ़ी गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) में अगले कुछ ही घंटों के भीतर पानी का भारी सैलाब पहुंचने की चेतावनी जारी की गई है।
नेपाल में भारी तबाही, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बहे
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन समेत पांच जिलों में अचानक आई इस बाढ़ के चलते हाई अलर्ट घोषित किया गया है। त्रिशूली नदी के उफान के कारण किनारे बसे गांवों और बस्तियों को खाली कराया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, भोटे कोशी और त्रिशूली नदी पर बन रहे चिलीमे और रसुवागढी जैसे 10 से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है और वे पानी के तेज बहाव में बह गए हैं। कई रिहायशी इलाकों के डूबने और भारी जान-माल के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
बिहार के तटीय इलाकों में अलर्ट, गंडक पर रखी जा रही नजर
नेपाल की त्रिशूली नदी का पानी आगे चलकर गंडक नदी तंत्र में मिलता है। ऐसे में जल संसाधन विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 2 से 3 घंटों में गंडक नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है। बिहार के मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण (वाल्मीकिनगर), पूर्वी चंपारण और गोपालगंज जैसे सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गंडक बैराज के सभी फाटकों और तटबंधों पर इंजीनियरों की टीम को 24 घंटे निगरानी रखने को कहा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।
निचले इलाकों को खाली कराने के निर्देश
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों के अनुसार, यदि पानी का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा तो गंडक के दियारा और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से प्रवेश कर सकता है। जिला प्रशासन ने नदी के किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित या ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील शुरू कर दी है।