बिहार के शहरों को मिलेगा नया विकास मॉडल: 12 सैटेलाइट टाउनशिप और 43 शहरों का मास्टर प्लान तैयार

First Lead Desk

बिहार के शहरों के सतत विकास पर मंथन: HUDCO के सहयोग से कार्यशाला आयोजित

पटना: अधिवेशन भवन, पटना के सभागार में नगर विकास एवं आवास विभाग तथा हडको (HUDCO) के सहयोग से “सस्टेनेबल प्लानिंग फॉर टाउन्स इन बिहार: अंडरस्टैंडिंग द प्रोसेस एंड एड्रेसिंग द चैलेंजेज” विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने की।

कार्यशाला में बिहार के नगरों और शहरों के समावेशी, सुव्यवस्थित एवं सतत विकास के लिए प्रभावी शहरी नियोजन की प्रक्रिया, उसकी आवश्यकताओं और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संभावित समाधान और कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।

विकसित शहर बनेंगे अर्थव्यवस्था के ग्रोथ सेंटर

मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि शहरों का विकास केवल बेहतर आवास और जीवन की सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित और सुव्यवस्थित शहर राज्य की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण ग्रोथ सेंटर भी बनते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर सुविधाओं से युक्त शहर निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी का स्पष्ट विजन है कि बिहार के सभी शहर चरणबद्ध तरीके से विकास और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हों तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दें।

मंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित रहने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण, दूरदर्शी सोच और सुनियोजित शहरी विकास को प्राथमिकता देनी होगी।

कार्यशाला को केवल अकादमिक अभ्यास न मानें: नीतीश मिश्रा

अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला को केवल अकादमिक अभ्यास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे बेहतर नियोजन, प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर शहरों के निर्माण के लिए नई प्रतिबद्धता के अवसर के रूप में लेना चाहिए।

उन्होंने HUDCO के अधिकारियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अनुभव और विशेषज्ञता का अधिकतम लाभ उठाया जाना चाहिए। अधिकारियों को विशेषज्ञों से संवाद करने, सवाल पूछने और एक-दूसरे की बेस्ट प्रैक्टिस से सीखने की आवश्यकता है।

श्री मिश्रा ने बिहार के नगर विकास की जिम्मेदारी संभाल रही युवा टीम पर विश्वास जताते हुए कहा कि आज लिए गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों के शहरों का स्वरूप तय करेंगे। हमारा लक्ष्य ऐसे शहरों का निर्माण होना चाहिए, जो दूरदर्शी नियोजन के साथ विकसित हों और बिहार के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करें।

12 नए सैटेलाइट टाउनशिप पर काम, 43 शहरों का मास्टर प्लान तैयार

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव श्री विनय कुमार ने कहा कि बिहार में शहरी विकास को नियोजित और टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों तथा GIS आधारित प्लानिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अधिकारियों को साक्ष्य आधारित योजनाएं तैयार करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

प्रधान सचिव ने कहा कि राज्य में 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके लिए HUDCO के साथ एक लाख करोड़ रुपये के लाइन ऑफ क्रेडिट का समझौता किया गया है। वहीं, बिहार के 43 शहरों के मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

वर्ष 2040 तक शहरी आबादी 80 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान

HUDCO के अध्यक्ष श्री संजय कुलश्रेष्ठ ने कहा कि देश में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है और वर्ष 2040 तक शहरी क्षेत्रों की आबादी लगभग दोगुनी होकर 80 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के शहरों का केवल विस्तार करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से मजबूत बनाना भी आवश्यक होगा।

उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन, अमृत, प्रधानमंत्री आवास योजना-2 और अर्बन चैलेंज फंड जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से स्वच्छता, जलापूर्ति, सीवेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को गति दी जा सकती है।

शुरुआत से नियोजित विकास जरूरी: डॉ. एन. श्रवण कुमार

दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. एन. श्रवण कुमार ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार देश के सबसे कम शहरीकृत राज्यों में शामिल है। हालांकि, आर्थिक विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए शहरीकरण को बढ़ावा देना आवश्यक है।

उन्होंने दिल्ली और जमशेदपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि अनियोजित विकास के बाद शहरों में रेट्रोफिटिंग करना काफी खर्चीला और कठिन होता है। इसलिए शुरुआत से ही नियोजित विकास पर विशेष जोर देना होगा।

उन्होंने स्थानीय हितधारकों के साथ चर्चा कर शहरों को अधिक लिवेबल बनाने की आवश्यकता बताई, ताकि लोगों को बेहतर अवसरों के लिए दूसरे स्थानों पर पलायन न करना पड़े।

मास्टर प्लान, GIS और AI के उपयोग पर विशेष चर्चा

कार्यशाला के दौरान मास्टर प्लान की आवश्यकता, उसके कानूनी प्रावधानों और प्रभावी शहरी नियोजन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। नगरों और शहरों की विशिष्ट विशेषताओं तथा स्थानीय चुनौतियों के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया।

इसके अलावा वर्तमान स्थिति के आकलन, भविष्य की संभावनाओं और नियोजन प्रस्तावों के लिए आवश्यक जनसांख्यिकीय, आर्थिक एवं स्थानिक आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण और उपयोग की जानकारी भी दी गई।

प्रस्तावित भू-उपयोग मानचित्र और टाउन प्लानिंग स्कीम तैयार करने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला में शहरी नियोजन में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया।

ये अधिकारी रहे मौजूद

कार्यशाला में विभाग के सचिव श्री संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी, सचिव-सह-बुडको एमडी श्री अनिमेष कुमार पराशर, बिहार हाउसिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक-सह-विशेष सचिव श्री निलेश रामचंद्र देवरे, अपर सचिव श्री मनोज कुमार, HUDCO की कार्यकारी निदेशक सुश्री वर्षा पुन्हानी समेत विभिन्न नगर निगमों और नगर निकायों के नगर आयुक्त, नगर कार्यपालक पदाधिकारी, अर्बन प्लानर्स, आर्किटेक्ट्स एवं विभागीय पदाधिकारी मौजूद रहे।

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